बहुत समय से देख रहा हूँ कुछ लोगों को कहते हुए कि हिन्दू संतों के खिलाफ साज़िश हो रही है । यद्यपि कुछ मामलों में यह बात ठीक लगती है परंतु कुछ काठ के उल्लू गधे घोड़े एक सामान की कहावत को सार्थक करते हुए गर्दभ अलाप करते हुए दिखाई देते हैं । जब शंकराचार्य जैनेन्द्र सरस्वती तथा स्वामी रामदेव पर आक्रमण हुए थे तब निश्चित तौर पर साज़िश वाली बात ठीक थी । आसाराम के बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता । परंतु खेद तो तब होता है जब कई स्वम्भू हिन्दू धर्मरक्षक रामपाल और राधेमाँ जैसे पाखंडियों के समर्थन में हिन्दू संतों का शगूफा लेकर उतर पड़ते हैं । राधे माँ किस कोण से इन्हें संत लगी यह समझ में नहीं आया । जिसके सर से पाँव तक बनावटीपन झलकता है, जिसको स्पष्ट कैमरे पर लोगों से गोद में उठवाते देखा जा सकता है ऐसी स्त्री को संत कहना धर्म की खिल्ली उड़ाना है । ज़रा फ़र्ज़ी धर्मरक्षक बताएंगे कि हिन्दू धर्म में गोद में उठाने आदि के सिद्धांत कहाँ पर हैं । एक अन्य ढोंगी है रामपाल जिसके बारे में जानते ही बहुत काम लोग हैं और बिना जाने स्वयं को हिन्दू कहने वाले कठमुल्ले हिन्दू संतों के खिलाफ साज़िश के नाम पर रामपाल का नाम जोड़कर गर्दभ अलाप करने लगते हैं । बंधुओं क्या तुम्हें पता भी है कि रामपाल के विचार क्या हैं तथा उनके अनुसार वह हिन्दू ठहरता भी है या नहीं । यह वह व्यक्ति है जो कबीर को ब्रह्म तथा विष्णु ब्रह्मा महेश का भी बाप बताता है ।इसके अतिरक्त त्रेता आदि युगों में हनुमान आदि पर कृपा भी कबीर ही करता है । अब बताओ भाई यह कौनसी हिन्दू थ्योरी है । इसके अतिरिक्त रामपाल के आश्रम से आपत्तिजनक सामान मिलना और उसके अनुयाइयों का भारतीय क़ानून व्यवस्था का आदर करने की बजाय पुलिस के विरुद्ध ही हथियार उठाकर खड़े हो जाना भी स्पष्ट देखा जा चुका है । यह संत है तो नाशक पता नहीं कौन है ।
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Monday, November 23, 2015
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